- रिपोर्ट: स्निग्धा श्रीवास्तव
बिहार के गोपालगंज जिले से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। हथुआ थाना क्षेत्र में दो शिक्षिकाओं पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी करने का आरोप लगा है। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
जानकारी के अनुसार, दोनों शिक्षिकाएं पिछले करीब 13 वर्षों से सरकारी विद्यालयों में कार्यरत थीं। उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अदालत के निर्देश पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान दोनों शिक्षिकाओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के उपाध्यक्ष सह सहायक जांचकर्ता आसिफ इकबाल मेहंदी ने हथुआ थाना में आवेदन देकर केस दर्ज कराया। पुलिस को जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य भी सौंपे गए हैं।
मामले में मटिहानी माधव मध्य विद्यालय की शिक्षिका अंजली कुमारी और पिपरा खास उत्क्रमित मध्य विद्यालय की शिक्षिका राखी सिंह को आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि अंजली कुमारी सिवान जिले के बरईपट्टी गांव निवासी ददन सिंह की पुत्री हैं, जबकि राखी सिंह ओरमा गांव निवासी विष्णु किशोर सिंह की बेटी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों वर्ष 2013 से शिक्षक पद पर कार्यरत थीं। इतने लंबे समय तक प्रमाण पत्रों की जांच नहीं होने पर अब सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सत्यापन होता तो मामला पहले ही उजागर हो सकता था।
इधर, प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी मिलते ही दोनों शिक्षिकाएं स्कूल छोड़कर फरार बताई जा रही हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।