नई दिल्ली: अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, रिहाई की मांग खारिज

New Delhi: Supreme Court gives Abu Salem a major setback, rejects his plea for release

नई दिल्ली: 1993 के खौफनाक मुंबई सीरियल बम धमाकों के दोषी और अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। Supreme Court of India ने उसकी रिहाई की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। यह अहम फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया। अदालत के सख्त रुख के बाद साफ हो गया है कि सलेम को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

वकील की दलील पर अदालत का कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान सलेम के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने 25 साल की सजा पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए। वकील के मुताबिक, सलेम को 11 नवंबर 2005 को हिरासत में लिया गया था और इस आधार पर उसकी सजा पूरी हो चुकी है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क पर तीखा सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि क्या बचाव पक्ष 25 साल की अवधि में छूट (रिमिशन) के समय को भी जोड़ रहा है? पीठ ने इन दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तें
अबू सलेम का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी चर्चित रहा है। वर्ष 2002 में फर्जी पासपोर्ट मामले में उसे पुर्तगाल में गिरफ्तार किया गया था। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया अपनाई। आखिरकार 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल ने उसे भारत को सौंप दिया।

प्रत्यर्पण से पहले पुर्तगाल ने शर्त रखी थी कि भारत सलेम को न तो फांसी की सजा देगा और न ही 25 साल से अधिक की कैद में रखेगा। पुर्तगाल के कानून में मृत्युदंड का प्रावधान नहीं होने के कारण भारत सरकार के आश्वासन के बाद ही फरवरी 2004 में वहां की अदालत ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।

1993 मुंबई धमाके: देश को दहला देने वाली साजिश
अबू सलेम 12 मार्च 1993 को हुए मुंबई सीरियल बम धमाकों का दोषी है। दोपहर 1:30 बजे से 3:40 बजे के बीच शहर में 12-13 स्थानों पर आरडीएक्स से भरे कार बम विस्फोट किए गए थे। यह भारत के इतिहास के सबसे भयावह और सुनियोजित आतंकी हमलों में से एक था।

आतंकियों ने Bombay Stock Exchange और Air India बिल्डिंग जैसी प्रमुख इमारतों को निशाना बनाया था। इन धमाकों में सैकड़ों लोगों की जान गई और देशभर में दहशत फैल गई थी।

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