नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वर धाम से जुड़ी संस्था को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने बागेश्वर धाम जन सेवा समिति को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत रजिस्ट्रेशन प्रदान कर दिया है। इसके साथ ही अब यह संस्था कानूनी रूप से विदेशों से चंदा प्राप्त कर सकेगी।
यह संस्था पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में संचालित होती है, जिन्हें बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर के रूप में जाना जाता है। अब तक संस्था को विदेशी फंड लेने की अनुमति नहीं थी, लेकिन एफसीआरए रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद यह बाधा समाप्त हो गई है।
क्या है एफसीआरए और क्यों जरूरी है अनुमति
भारत में कोई भी एनजीओ या धार्मिक-सामाजिक संस्था यदि विदेश से आर्थिक सहायता लेना चाहती है, तो उसे पहले एफसीआरए के तहत सरकार से अनुमति लेनी होती है। इसका उद्देश्य विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकना है।
अनुमति मिलने के बाद ही संस्थाएं सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक या सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विदेशी दान स्वीकार कर सकती हैं।
कई क्षेत्रों में काम के लिए मिला रजिस्ट्रेशन
बागेश्वर धाम जन सेवा समिति को धार्मिक (हिंदू), सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की विभिन्न श्रेणियों में रजिस्ट्रेशन मिला है। इसका मतलब है कि अब संस्था इन सभी क्षेत्रों में काम करने के लिए विदेशों से फंड प्राप्त कर सकती है।
देश-विदेश में बढ़ती पहचान
गौरतलब है कि बागेश्वर धाम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने अनुयायियों के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पिछले कुछ समय में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने धार्मिक आयोजनों और बयानों को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं।
केंद्र सरकार से एफसीआरए रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद अब संस्था की गतिविधियों के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अब इसे विदेशी फंडिंग का भी रास्ता मिल गया है।