पटना: भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता और प्रभारी अधीक्षण अभियंता वासुदेव कुमार मंडल को सरकार ने सेवानिवृत्ति के बाद दंडित किया है। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने घूस लेते पकड़े गए दो कर्मियों को संरक्षण दिया था। इस मामले में विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर उनकी पेंशन में कटौती की गई है।
जानकारी के मुताबिक, पूर्णिया भवन प्रमंडल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता और प्रभारी अधीक्षण अभियंता (पूर्णिया अंचल) वासुदेव प्रसाद मंडल पर गंभीर आरोप लगे थे। उन्होंने घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए दो कर्मियों—शत्रुघ्न प्रसाद सिंह (लिपिक) और रंजीत सिंह (वरीय लेखा लिपिक), जो उस समय किशनगंज में पदस्थापित थे—को अपने स्तर से निलंबन मुक्त कर भवन प्रमंडल खगड़िया में पदस्थापित कर दिया था। इस पूरे मामले की जानकारी उन्होंने विभाग को नहीं दी और विभाग को अंधेरे में रखा।
इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में आरोपी कर्मी रंजीत सिंह के जेल से बाहर आने के बाद भी विभागीय निर्देशों की अवहेलना करते हुए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इन आरोपों को गंभीर मानते हुए 5 जून 2014 को ही वासुदेव प्रसाद मंडल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी।
मामले की जांच के बाद संचालन पदाधिकारी ने 30 जुलाई 2025 को अपना प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें वासुदेव मंडल पर लगे सभी आरोप प्रमाणित पाए गए। इसके बाद सरकार ने सेवानिवृत्त हो चुके वासुदेव प्रसाद मंडल की पेंशन से 40 प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया, जिसे लागू कर दिया गया है।