नई दिल्ली/बेंगलुरु। आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज से होने वाली मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब अगर किसी व्यक्ति की कुत्ते के काटने से मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को राज्य सरकार 5 लाख रुपये की सहायता राशि देगी।
गंभीर रूप से घायल होने वालों के लिए भी मुआवजे का प्रावधान किया गया है। यदि कुत्ते ने त्वचा फाड़ दी हो, गहरी चोट पहुंचाई हो, फटने वाली चोट (laceration) हो या एक साथ कई जगह काट लिया हो, तो पीड़ित को कुल 5,000 रुपये दिए जाएंगे। इसमें 3,500 रुपये सीधे पीड़ित को और 1,500 रुपये इलाज के लिए सुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट को दिए जाएंगे।
इधर, तमिलनाडु में स्थिति और भी भयावह है। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने एक अखबार के हवाले से बताया कि इस साल अभी तक तमिलनाडु में कुत्तों के काटने के करीब 5.25 लाख मामले दर्ज हुए हैं और रेबीज से 28 लोगों की मौत हो चुकी है। चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जो लोग कुत्तों से बहुत प्यार करते हैं, उनकी भावनाएं जायज हैं, लेकिन ये डरावने आंकड़े भी देखने चाहिए।”
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तुरंत आदेश दिया है कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि सभी सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को फौरन हटाया जाए।
कोर्ट ने साफ कहा है कि इन जगहों से पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि पकड़े गए कुत्तों को नामित कुत्ता आश्रय गृह (डॉग शेल्टर) में भेजा जाए।
देश भर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और अब सरकारें एवं न्यायपालिका दोनों ही इस दिशा में ठोस कदम उठा रही हैं।