नई दिल्ली: अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने हिंडनबर्ग मामले में बाजार नियामक सेबी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अंततः सत्य की जीत हुई है। बुधवार को शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि सेबी द्वारा हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के आरोपों को खारिज करना समूह के पारदर्शी कार्यशैली और संचालन की पुष्टि करता है।
अपने पत्र में अडानी ने कहा कि यह संकटकाल अब समाप्त हो चुका है और समूह अब भविष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने लिखा, “हम अपने कारोबार को और मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।” संकट के दौरान निवेशकों, ऋणदाताओं और साझेदारों के समर्थन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “हम राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को दोगुनी ताकत के साथ आगे बढ़ाएंगे।”
गौतम अडानी ने सेबी के फैसले को उस लंबी जांच अवधि का अंत बताया, जिसने समूह के हर पहलू की कड़ी परीक्षा ली। उन्होंने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को न केवल समूह पर हमला, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहुंचने का सपना देखने वाले भारतीय उद्यमों के साहस के खिलाफ एक चुनौती करार दिया।
पत्र का समापन करते हुए अडानी ने समूह के मूल मूल्यों- विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता, कार्यों में ईमानदारी और भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कवि सोहन लाल द्विवेदी की पंक्तियों का हवाला देते हुए लिखा, “लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती… कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।”