नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता को और गहरा कर दिया है। इसी बीच युद्ध को समाप्त करने की मांग तेज हो गई है और कूटनीतिक प्रयासों में भी तेजी देखी जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमलों में विराम देने के संकेत दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान की ओर से वार्ता में कौन प्रतिनिधित्व कर रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने कई अहम शर्तें रखी हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने, सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली कार्रवाई रोकने की मांग की है। इसके साथ ही, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार भी मांगा है।
ईरान की प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं:
-अमेरिका भविष्य में ईरान पर हमला नहीं करेगा, इसकी ठोस सुरक्षा गारंटी।
-होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए नई समुद्री व्यवस्था।
-पूरे पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाना।
-युद्ध में हुए नुकसान के लिए वित्तीय मुआवजा।
-पांच वर्षों तक बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और यूरेनियम संवर्धन में कमी।
-60% तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर बातचीत के लिए सहमति।
-अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को निरीक्षण की अनुमति।
– क्षेत्र में प्रॉक्सी समूहों को मिलने वाली फंडिंग रोकना।
पहले भी रखी जा चुकी हैं शर्तें
इससे पहले 12 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा था कि युद्ध तभी समाप्त होगा जब ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाएगी, नुकसान की भरपाई की जाएगी और भविष्य में हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह बयान रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के बाद दिया था।
गौरतलब है कि इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई वरिष्ठ राजनयिक अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना से इनकार कर चुके थे। उनका आरोप था कि परमाणु वार्ता के दौरान ईरान के साथ विश्वासघात किया गया था।