मनरे विधायक और पंचायत सचिव की बहस का ऑडियो वायरल, जूते से मारने की धमकी पर मचा बवाल

Audio of the debate between Manre MLA and Panchayat Secretary goes viral, uproar over threat of hitting with shoes

पटना/मनेर: पश्चिम चंपारण के मनेर से राजद विधायक भाई वीरेंद्र को पंचायत सचिव को फोन पर धमकाना भारी पड़ गया है। वायरल ऑडियो में विधायक जी पंचायत सचिव को जूते से मारने की धमकी देते सुने जा रहे हैं। यह ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर लोग चर्चाएं कर रहे हैं, कुछ इसे वेब सीरीज़ “पंचायत” के दृश्य से भी जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर विधायक की तुलना ‘पंचायत’ के ‘विधायक जी’ से की जा रही है, जहां पंचायत सचिव उन पर भारी पड़ जाता है। कुछ लोगों ने इसे “रील टू रियल” बताया है।

वायरल ऑडियो में क्या है?
वायरल ऑडियो में मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र, पंचायत सचिव को एक व्यक्ति के मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर फोन करते हैं। बातचीत के दौरान जब सचिव उन्हें पहचान नहीं पाता और ‘बोलिए’ कहता है, तो विधायक भड़क जाते हैं और कहते हैं:

“तू मनेर के विधायक को नहीं पहचानता? इंग्लैंड से आया है क्या? जूते से मारेंगे खींचकर!”

बातचीत में पंचायत सचिव संयम बनाए रखता है और कहता है कि आप प्रेम से बात करेंगे तो हम भी प्रेम से जवाब देंगे। सचिव स्पष्ट रूप से कहता है कि उसे किसी से डर नहीं है और वह नियमों के अनुसार ही काम करेगा। यह बातचीत इतनी गरम हो जाती है कि सचिव अंत में कहता है — “आप जो करना है करिए, ट्रांसफर करवा दीजिए, धमकी मत दीजिए।”

सोशल मीडिया पर आलोचना और ट्रोलिंग
ऑडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोग जमकर विधायक भाई वीरेंद्र की आलोचना करने लगे। कई यूज़र्स ने इसे जनप्रतिनिधि के घमंड और सरकारी कर्मचारी के संयम का उदाहरण बताया। ट्रोलिंग बढ़ने पर विधायक ने खुद फेसबुक पर सफाई दी।

विधायक की सफाई
भाई वीरेंद्र ने फेसबुक पोस्ट में लिखा:

“मैं स्वीकार करता हूं कि बातचीत में मेरे कुछ शब्द कठोर थे, पर पंचायत सचिव ने मेरे साथ शिष्टाचार नहीं दिखाया। न अभिवादन किया, न ही जनता के कार्य को गंभीरता से लिया।”

उन्होंने यह भी कहा कि फोन कॉल रिकॉर्ड कर वायरल करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि निजता के अधिकार और आईटी एक्ट के तहत दंडनीय भी है।

जनता और अधिकारी के बीच टकराव या जवाबदेही?
यह घटना न सिर्फ एक स्थानीय विवाद बन गई है, बल्कि इसमें राजनीति बनाम प्रशासनिक व्यवस्था की एक झलक भी देखने को मिल रही है। आम जनता इस बहस को देखते हुए सवाल कर रही है कि जनप्रतिनिधियों को कितनी जिम्मेदारी से अपनी भाषा और अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए।

अब देखना होगा कि इस मामले में पार्टी नेतृत्व और प्रशासन क्या कदम उठाता है। फिलहाल, पंचायत सचिव को लेकर सोशल मीडिया पर ‘नायक’ का दर्जा मिल रहा है और विधायक को ‘विलेन’ की तरह देखा जा रहा है।

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