बिहार के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब यदि किसी किसान की जमीन उसके स्वयं के नाम पर दर्ज नहीं होकर पिता, दादा या अन्य पूर्वजों के नाम पर है, तब भी उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल सकेगा। सरकार ने वंशावली के आधार पर फार्मर आईडी बनाने की अनुमति दे दी है, जिससे लंबे समय से चली आ रही हजारों किसानों की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।
अब तक फार्मर आईडी बनवाने में सबसे बड़ी बाधा यह थी कि जमीन का खतियान सीधे किसान के नाम पर न होने की स्थिति में आवेदन स्वतः निरस्त हो जाता था। इसके कारण बड़ी संख्या में किसान पीएम किसान योजना से वंचित रह जाते थे। नियमों में बदलाव के बाद अब पिता, दादा या पूर्वजों के नाम की जमाबंदी होने पर भी किसान का पंजीकरण संभव हो गया है।
कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वंशावली के आधार पर फार्मर रजिस्ट्री की शुरुआत होते ही पंजीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। कई जिलों में एक ही दिन में हजारों किसानों की फार्मर आईडी तैयार की गई है। संयुक्त जमाबंदी की स्थिति में भी परिवार के अलग-अलग सदस्यों का अलग-अलग रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बड़ी राहत मिल रही है।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वंशावली के आधार पर रजिस्ट्रेशन के दौरान सभी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। फर्जी या गलत फार्मर आईडी बनने की किसी भी शिकायत पर सॉफ्टवेयर स्तर पर सख्ती बरती जा रही है। नाम और जमाबंदी में अधिक अंतर पाए जाने पर आवेदन को स्वीकृति नहीं दी जा रही है।
कृषि विभाग का कहना है कि जिन किसानों की ई-केवाईसी पहले से पूरी है, उन्हें फार्मर आईडी बनवाने में किसी तरह की ज्यादा परेशानी नहीं होगी। गांव स्तर पर कैंप लगाकर किसानों की सहायता की जा रही है। किसान सलाहकार और कृषि कर्मी घर-घर जाकर किसानों को आवश्यक जानकारी भी दे रहे हैं।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी पात्र किसानों की फार्मर आईडी जल्द तैयार कर ली जाएगी, ताकि पीएम किसान योजना का लाभ मिलने में किसी को भी परेशानी न हो। वंशावली के आधार पर रजिस्ट्रेशन की यह सुविधा विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, जिनकी जमीन पीढ़ियों से परिवार के नाम पर है लेकिन अब तक नामांतरण नहीं हो सका था।