बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लगातार सुधारात्मक कार्रवाई कर रहा है और विभागीय कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने के लिए सख्त रुख अपनाया जा रहा है। इसी क्रम में विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आज विभाग की मौजूदा स्थिति, सुधार प्रक्रिया और भविष्य की रणनीति को लेकर अहम बयान दिए।
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विभाग में सुधार की प्रक्रिया को धीरे-धीरे और बेहद सतर्कता के साथ लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम होम्योपैथिक इलाज करते हैं और देसी इलाज पर भरोसा रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर एलोपैथिक व्यवस्था और ऑपरेशन भी मौजूद है।” उनके इस बयान से साफ है कि विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी और संतुलित समाधान पर जोर दे रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग “धीरे-धीरे डोज देने” की नीति पर काम कर रहा है। अगर सुधारों को अचानक या अत्यधिक दबाव के साथ लागू किया गया, तो इससे प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए छोटे-छोटे कदम उठाकर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। मंत्री ने इस प्रक्रिया की तुलना होम्योपैथिक उपचार से करते हुए कहा कि जैसे दवा की थोड़ी-थोड़ी मात्रा से बीमारी को जड़ से ठीक किया जाता है, वैसे ही विभागीय सुधार भी क्रमबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं।
विजय कुमार सिन्हा ने यह भी कहा कि फिलहाल सुधार होम्योपैथिक तरीके से जारी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कड़े कदम यानी एलोपैथिक उपाय और ऑपरेशन जैसे फैसले लेने से भी विभाग पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अधिकारियों के लिए 31 मार्च तक की समयसीमा और स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं, ताकि कामकाज में तेजी और पारदर्शिता बनी रहे।
मंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि विभागीय मामलों में लापरवाही, अनावश्यक देरी या भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब विभाग पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि सटीक और प्रभावी कार्रवाई के साथ आगे बढ़ेगा।
गौरतलब है कि इस वित्तीय वर्ष में बिहार में भूमि सुधार और जनसुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। सामान्य आवेदनों की निष्पादन दर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में 75.30 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके साथ ही लंबित मामलों की संख्या में 30 हजार से अधिक की कमी दर्ज की गई है। यह सुधार प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।