बिहार के सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने दिसंबर माह के लिए ‘टीचर ऑफ द मंथ’ की सूची जारी कर दी है। इस सूची में राज्य के विभिन्न जिलों के 25 प्रखंड स्तरीय शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर सम्मानित किया गया है। सम्मान पत्र शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस पहल का मकसद शिक्षकों का मनोबल बढ़ाना और सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है। चयन प्रक्रिया में शिक्षण कार्य की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम, नवाचार, नियमित उपस्थिति और विद्यालय प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी जैसे मानकों को प्रमुख आधार बनाया गया।
इस बार बिहार के अररिया, बांका, भोजपुर, गया, कैमूर, खगड़िया, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण और सुपौल सहित कई जिलों के शिक्षकों को सूची में स्थान मिला है। अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड की कुमारी अनु साह और नरपतगंज के शशांक कुमार को उनके सराहनीय कार्य के लिए चयनित किया गया। वहीं बांका से मुकेश कुमार और आभा कुमारी को भी सम्मानित किया गया।
भोजपुर के परवेज हुसैन और मो. कामरान कुरैशी ने अपने विद्यालयों में शैक्षणिक सुधार और विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। गया जिले से गुड्डी कुमारी, विकास कुमार, सुजीता कुमारी और रखसन हाशमी को भी ‘टीचर ऑफ द मंथ’ का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कैमूर के धीरज कुमार और कृष्णा सिंह राठौर को भी बेहतर शिक्षण कार्य के लिए सम्मान मिला।
खगड़िया जिले से रिंकी कुमारी, सूरज कुमार, आशुतोष कुमार, सागर सुमन, नुजहत खातुन और प्रीतम कुमार को सूची में शामिल किया गया। मधेपुरा की नीतू कुमारी, मुंगेर के नगीना प्रसाद सिंह और संजय कुमार यादव को भी विभाग ने सराहा।
मुजफ्फरपुर के अमितेश कुमार, पश्चिम चंपारण के अभिषेक वाजपेयी और सुपौल की अर्चना कुमारी को भी दिसंबर माह का उत्कृष्ट शिक्षक चुना गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन शिक्षकों ने सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यालयों में सकारात्मक बदलाव लाने का उल्लेखनीय प्रयास किया है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पहल आगे भी जारी रहेगी और प्रत्येक माह प्रखंड स्तर पर बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। इससे शिक्षकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा।