नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पहलगाम आतंकी हमले की न्यायिक जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायपालिका आतंकवाद मामलों की जांच में विशेषज्ञ नहीं है और ऐसे मामलों को कोर्ट में लाकर सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना उचित नहीं है।
पीठ ने स्पष्ट कहा कि देश इस समय एकजुट होकर आतंकवाद से लड़ रहा है, ऐसे में इस तरह की याचिकाएं राष्ट्रहित के विपरीत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या वे ऐसी याचिका के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों पर अविश्वास जताना चाहते हैं?
इस बीच, पहलगाम हमले को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) ने बताया है कि आतंकी हमले से दो दिन पहले बैसरन घाटी में मौजूद थे।
इसके अलावा आतंकियों ने तीन अन्य जगहों की भी रेकी की थी, जिनमें आरू घाटी, एम्यूज़मेंट पार्क और बेताब घाटी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि आतंकी 15 अप्रैल को ही घाटी में दाखिल हो गए थे, यानी हमले की पूरी साजिश पहले से रची जा चुकी थी।