प्रयागराज: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दौरान श्रद्धालु माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ हो रहे हैं और इसी दिन हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत हो रही है, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है।
प्रयागराज की पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:50 बजे से 7:52 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:50 बजे तक है। उन्होंने कहा कि इस बार यही दो प्रमुख मुहूर्त हैं, इसलिए श्रद्धालुओं को इन्हीं समयों में कलश स्थापना करना शुभ रहेगा।
पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार माता रानी पालकी में सवार होकर आ रही हैं, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि कलश स्थापना करते समय श्रद्धा और भक्ति का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पहले दिन नौ लौंग को कलावे में बांधकर माला बनाकर माता को अर्पित करने से मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
उन्होंने कलश स्थापना की विधि बताते हुए कहा कि सोने, चांदी या किसी भी धातु का कलश इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन मिट्टी का कलश सबसे शुभ माना जाता है। कलश में जल भरकर उसमें गंगाजल, हल्दी की गांठ, सुपारी, लौंग, इलायची, सिक्का, अक्षत और फूल डालें। इसके बाद कलश पर आम या अशोक के पांच या सात पत्ते रखें।
अंत में कलश के ऊपर एक पात्र में चावल भरकर रखें और लाल कपड़े में लिपटा हुआ नारियल उसके ऊपर स्थापित करें। इस पूरी विधि के बाद कलश को माता के चरणों में समर्पित करें। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई यह स्थापना पूरे नवरात्र में शुभ फल प्रदान करती है।