नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 भारतीयों की शहादत के बाद देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस हमले ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। भारत की संभावित कड़ी प्रतिक्रिया को लेकर पाकिस्तान में खौफ का माहौल है, खासकर पुलवामा हमले के बाद हुई एयरस्ट्राइक की यादें ताजा होने के चलते।
लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग है। सूत्रों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई से हटकर एक नई और बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसने पाकिस्तान को चौंका दिया है। यह रणनीति ‘डिफेंसिव ऑफेंस’ यानी ‘रक्षात्मक आक्रमण’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे डोभाल ने 2014 में सार्वजनिक रूप से सामने रखा था।
डोभाल का मानना है कि अब समय आ गया है जब भारत को केवल जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि आक्रामक रुख अपनाकर पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरियों को निशाना बनाना चाहिए। उन्होंने पहले भी कहा था, “अगर पाकिस्तान एक मुंबई करता है, तो उसे बलूचिस्तान खोने के लिए तैयार रहना चाहिए।” इसका मतलब है कि भारत को आतंकी खतरे की जड़ – यानी पाकिस्तान – को ही निशाना बनाना होगा।
इस रणनीति में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करना, उसके आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करना और अफगानिस्तान जैसे देशों के साथ मिलकर रणनीतिक दबाव बनाना शामिल हो सकता है।
फिलहाल पाकिस्तान के हालात भी डोभाल की रणनीति के लिए अनुकूल हैं। वहां जनता का अपनी ही सरकार और सेना से विश्वास उठता जा रहा है, और देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत को अमेरिका और यूरोपीय देशों का समर्थन मिल रहा है। यहां तक कि पाकिस्तान का परंपरागत सहयोगी चीन भी अब भारत से रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
ऐसे में केंद्र सरकार अजीत डोभाल जैसे अनुभवी और तेजतर्रार रणनीतिकार के साथ मिलकर पाकिस्तान को उसकी हरकतों का करारा जवाब देने की तैयारी में है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत अब केवल जवाब देने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि खतरे को वहीं खत्म करेगा, जहां से वह पैदा होता है।