प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा के दूसरे और अंतिम दिन, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी और उनके मॉरीशस के समकक्ष प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम की उपस्थिति में बुधवार को आठ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। ये समझौते अपराध जांच, समुद्री यातायात निगरानी, बुनियादी ढांचा कूटनीति, वाणिज्य, क्षमता निर्माण, वित्त और महासागर अर्थव्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं।
भारत-मॉरीशस संबंधों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने किया संबोधन
संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत-मॉरीशस के बीच संबंध केवल हिंद महासागर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारी साझा सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों से भी जुड़े हैं। हम आर्थिक और सामाजिक प्रगति की राह पर एक-दूसरे के साथी हैं। प्राकृतिक आपदाएं हो या कोविड की विपदा, हमने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है। रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में हम कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। पिछले दस वर्षों में हमने अपने संबंधों में कई नए आयाम जोड़े हैं।”
भारत मॉरीशस के साथ संसद भवन बनाने में करेगा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी ऐलान किया कि भारत मॉरीशस में संसद की नई बिल्डिंग बनाने में सहयोग करेगा। उन्होंने इसे ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ की ओर से मॉरीशस को दी गई एक महत्वपूर्ण भेंट बताया। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत, मॉरीशस के 500 सिविल सर्वेंट्स को ट्रेनिंग प्रदान करेगा।
लोकल करेंसी में व्यापार के लिए सहमति
भारत और मॉरीशस के बीच लोकल करेंसी में आपसी व्यापार के सेटलमेंट पर भी सहमति बनी है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण पर भी दिया बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस को भारत का एक अहम साझेदार बताते हुए ग्लोबल साउथ के लिए भारत का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि इसका मंत्र ‘महासागर’ होगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति को बढ़ावा देना है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम को भारत आने का आमंत्रण भी दिया।