नई दिल्ली : दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल फ्रांस इन दिनों बढ़ते सार्वजनिक कर्ज को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सख्त वित्तीय सुधार नहीं किए, तो वर्ष 2050 तक देश का सार्वजनिक कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 200 प्रतिशत से भी अधिक हो सकता है। यह स्थिति फ्रांस की आर्थिक स्थिरता और निवेशकों के भरोसे पर गहरा असर डाल सकती है।
3.5 ट्रिलियन यूरो के पार पहुंच चुका सरकारी कर्ज
रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज 3.5 ट्रिलियन यूरो से अधिक हो चुका है, जो देश की GDP का लगभग 117 प्रतिशत है। बढ़ती ब्याज दरों, धीमी आर्थिक वृद्धि और लगातार बजटीय घाटे ने सरकार की वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
OECD की चेतावनी- 2050 तक दोगुना हो सकता है कर्ज
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के महासचिव माथियास कॉर्मन ने चेतावनी दी है कि यदि फ्रांस ने सार्वजनिक खर्च पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन नहीं अपनाया, तो वर्ष 2050 तक सरकारी कर्ज GDP के लगभग 203 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञ इसे ‘डेट स्नोबॉल इफेक्ट’ यानी कर्ज के तेजी से बढ़ते चक्र का खतरा बता रहे हैं।
ब्याज भुगतान बन रहा सबसे बड़ा बोझ
फ्रांस के लिए सबसे बड़ी चिंता कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान है। वर्ष 2025 में सरकार को करीब 66 अरब यूरो ब्याज के रूप में चुकाने पड़े। अनुमान है कि 2029 तक यह राशि 100 अरब यूरो के करीब पहुंच सकती है, जो शिक्षा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के बजट से भी अधिक होगी।
राजनीतिक अस्थिरता से मुश्किलें बढ़ीं
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक मतभेद और कमजोर सरकार के कारण बड़े वित्तीय सुधारों को लागू करना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
आर्थिक सुधारों की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रांस को खर्चों में कटौती, बजटीय घाटा कम करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए ठोस नीतिगत फैसले लेने होंगे। समय रहते सुधार नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में देश पर कर्ज का बोझ और तेजी से बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।