भारतीय डॉक्टरों ने मोटापे की नई परिभाषा तैयार की, पेट के मोटापे पर आधारित

Indian doctors created a new definition of obesity, based on abdominal obesity

नई दिल्ली: एक नए अध्ययन में भारतीय डॉक्टरों ने भारतीय आबादी के लिए मोटापे की परिभाषा को नए सिरे से तैयार किया है, जो अब पेट के आसपास के मोटापे (एब्डॉमिनल ओबेसिटी) और उससे जुड़ी बीमारियों को आधार बनाता है। यह अध्ययन बुधवार को प्रकाशित हुआ और इसमें एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ भी शामिल थे।

अब तक मोटापे की परिभाषा में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) का उपयोग किया जाता था, लेकिन इस नए शोध ने पेट के आसपास की चर्बी और इससे जुड़ी बीमारियों जैसे डायबिटीज और हृदय रोग को मोटापे की परिभाषा में शामिल किया है। यह शोध द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

मोटापे से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है

नई परिभाषा का उद्देश्य भारतीयों में मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को सही समय पर पहचानना और उनका समाधान ढूंढना है। पुराने बीएमआई विधि में केवल वजन और ऊंचाई के अनुपात पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब नए आंकड़े बताते हैं कि पेट के आसपास की चर्बी भारतीयों में जल्दी बढ़ती है और इससे जुड़ी बीमारियों का खतरा भी ज्यादा होता है। यह चर्बी इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़ी होती है, जो भारतीयों में अधिक पाई जाती है।

एम्स दिल्ली के प्रोफेसर का महत्वपूर्ण बयान

एम्स दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. नवल विक्रम ने कहा, “भारतीयों के लिए मोटापे की एक अलग परिभाषा बेहद जरूरी थी, ताकि बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सके और उनकी सही देखभाल की जा सके। यह अध्ययन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

फोर्टिस सी-डॉक अस्पताल के डॉ. अनूप मिश्रा का बयान

फोर्टिस सी-डॉक अस्पताल के डॉ. अनूप मिश्रा ने कहा, “भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी। ये गाइडलाइंस पूरे देश के लिए उपयोगी और लागू करने में आसान हैं। इनसे मोटापे से जुड़ी बीमारियों का सही समय पर इलाज संभव होगा।”

नई गाइडलाइंस में मोटापे को दो चरणों में बांटा गया

नई गाइडलाइंस में मोटापे को दो चरणों में बांटा गया है:

  1. चरण 1: इस चरण में शरीर में वसा की मात्रा बढ़ती है, लेकिन इसका किसी अंग के कार्यों या सामान्य गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, इसमें कोई रोग संबंधी समस्याएं नहीं होतीं, लेकिन यह चरण बाद में प्रगति कर सकता है।
  2. चरण 2: यह मोटापे का एडवांस स्टेज है, जिसमें पेट में वसा की अधिकता के साथ-साथ कमर का घेरा भी बढ़ता है। इस चरण में शारीरिक समस्याएं जैसे घुटने का गठिया या टाइप 2 मधुमेह की संभावना बढ़ जाती है।

अध्ययन ने सुझाव दिया है कि नई श्रेणियों के अनुसार वजन घटाने की रणनीतियां तैयार की जाएं ताकि मोटापे से जुड़ी समस्याओं का प्रभावी समाधान हो सके।

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