पटना: बिहार में शिक्षा विभाग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य में अब जितने भी सरकारी स्कूलों का निर्माण किया जाएगा, इसके लिए एक एजेंसी तय कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र भी जारी किया है।
विभिन्न एजेंसियों से विकास कार्यों में कठिनाई
शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया कि विकास कार्यों की निरीक्षण और समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि राज्य के विभिन्न विकास कार्यों का क्रियान्वयन कई एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है, जैसे बिहार शिक्षा परियोजना, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, जिला परिषद, भवन निर्माण विभाग, जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रधानाध्यापक आदि।
ई-शिक्षा कोष पर अपलोड किए गए आंकड़ों की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि जिला स्तर पर असैनिक कार्यों का क्रियान्वयन होने के कारण जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी और प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी विद्यालयों के शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, जिससे शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे योजनाओं का समग्र और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन में कठिनाई हो रही है।
50 लाख रुपये तक की योजनाओं में समस्या
वर्तमान में, जिला स्तरीय समिति के माध्यम से जिला शिक्षा पदाधिकारी 50 लाख रुपये तक की योजना क्रियान्वित कर सकते हैं, जिससे एक ही विद्यालय परिसर में कई योजनाएं 50 लाख की सीमा में बांधकर क्रियान्वित की जा रही हैं। इस वजह से एक विद्यालय का समेकित विकास संभव नहीं हो पा रहा है और कई संवेदकों के कार्यरत होने से योजनाओं की गुणवत्ता की निगरानी में भी मुश्किलें आ रही हैं।
बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम को जिम्मेदारी
अब यह निर्णय लिया गया है कि शिक्षा विभाग के सभी विकास कार्यों का क्रियान्वयन 31 मार्च 2025 के बाद केवल बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (BSEIDC) के माध्यम से ही किया जाएगा। फिलहाल, प्रधानाध्यापक अपने स्तर पर मरम्मत के कार्य कर सकते हैं, जिसकी अधिकतम राशि 50 हजार रुपये है और यह राशि उनके खाते में विभाग द्वारा स्थानांतरित की जाएगी।
31 मार्च 2025 के बाद का परिवर्तन
31 मार्च 2025 के बाद, किसी भी निर्माण कार्य के लिए राशि जिला शिक्षा पदाधिकारी को नहीं दी जाएगी। विभाग सीधे बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड को राशि उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था के बाद, जिला शिक्षा पदाधिकारी केवल शैक्षणिक कार्यों में अपना ध्यान केंद्रित करेंगे, जबकि सभी निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड को सौंप दी जाएगी।