नई दिल्ली: दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार अब और सख्त कदम उठाने जा रही है। देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और जानलेवा हादसों को देखते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने बड़ा फैसला लिया है। जनवरी 2026 से भारत में बनने वाले सभी नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) को अनिवार्य कर दिया जाएगा।
🚦 क्या है नया नियम?
- अब तक ABS केवल 125cc से ऊपर के दोपहिया वाहनों में जरूरी था।
- नए नियम के तहत इंजन क्षमता कुछ भी हो, हर नई बाइक और स्कूटर में ABS लगाना अनिवार्य होगा।
- इससे पहले 125cc से कम की बाइक्स, जैसे हीरो स्प्लेंडर, होंडा शाइन, बजाज प्लैटिना, टीवीएस स्पोर्ट आदि, ABS के दायरे में नहीं आती थीं।
🛡️ ABS कैसे काम करता है?
ABS (Anti-Lock Braking System) एक ऐसा सुरक्षा फीचर है जो ब्रेक लगाने पर पहियों को लॉक होने से रोकता है। इसमें लगे सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) पहियों की गति पर नजर रखते हैं। जैसे ही पहिया फिसलने लगता है, ABS तुरंत ब्रेक का दबाव घटाता है और फिर से लागू करता है, जिससे वाहन का संतुलन बना रहता है।
🛵 ABS के दो प्रकार:
- सिंगल चैनल ABS – केवल आगे के पहिए पर काम करता है।
- डुअल चैनल ABS – आगे और पीछे दोनों पहियों पर काम करता है, ज्यादा सुरक्षित।
🎯 क्यों जरूरी है यह कदम?
भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन शामिल होते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 44% मौतें दोपहिया चालकों की होती हैं, जिनमें से अधिकतर सिर में चोट या ब्रेक फेल होने से होती हैं। ABS इन घटनाओं को काफी हद तक टाल सकता है।
🪖 दो हेलमेट भी होंगे जरूरी
सरकार केवल ABS तक सीमित नहीं है। जल्द ही एक नया नियम लाया जाएगा, जिसके तहत हर दोपहिया वाहन की बिक्री के समय दो BIS प्रमाणित हेलमेट देना अनिवार्य होगा। इससे खराब या नकली हेलमेट से होने वाली मौतों को रोका जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी यह स्पष्ट किया है कि हेलमेट की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और BIS सर्टिफाइड हेलमेट ही वाहन के साथ दिए जाएंगे।
🧠 निष्कर्ष
भारत में 2026 से हर नई बाइक और स्कूटर में ABS जरूरी होगा, चाहे उसका इंजन कितना भी छोटा क्यों न हो। इसके साथ दो प्रमाणित हेलमेट देने का नियम भी लागू किया जाएगा। सरकार का ये कदम दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। अब वाहन निर्माता कंपनियों को समय रहते अपने उत्पादों को इन मानकों के अनुरूप बनाना होगा।