भारत में सैटेलाइट आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को देश के स्पेस रेगुलेटर भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) से मंजूरी मिल गई है।
इन-स्पेस की वेबसाइट पर जारी अधिकृत सूची के अनुसार, अब स्टारलिंक के सामने भारत में कमर्शियल सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की अंतिम नियामक बाधा भी दूर हो गई है। कंपनी को अब भारत सरकार से स्पेक्ट्रम हासिल करना होगा और इसके लिए आवश्यक जमीनी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने बताया है कि सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद स्टारलिंक को ट्रायल स्पेक्ट्रम भी दिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होते ही कंपनी भारत में कुछ ही महीनों में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू कर सकती है।
स्टारलिंक पहले ही भारत में वीसैट प्रोवाइडर्स के साथ व्यावसायिक समझौते कर चुकी है। वीसैट सेवा विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां स्थलीय कनेक्टिविटी नहीं के बराबर होती है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में कहा था कि भारत में स्टारलिंक सेवा के प्रवेश के लिए सभी आवश्यक जांचें पूरी हो चुकी हैं, और स्पेस रेगुलेटर की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी सेवा शुरू करने के लिए स्वतंत्र है।
स्टारलिंक, पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद 6,750 से अधिक सैटेलाइट्स के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान करता है। वर्तमान में यह सेवा मंगोलिया, जापान, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, यमन, अजरबैजान और श्रीलंका जैसे कई देशों में पहले से ही चालू है।
अब भारत में भी इस हाई-स्पीड, सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा की शुरुआत से दूरदराज के इलाकों को इंटरनेट से जोड़ने में बड़ा बदलाव आ सकता है।