नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। इस बैठक में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर एक कड़ा विरोध प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही तीन बड़े विकास कार्यों को भी हरी झंडी मिली।
आपातकाल पर कैबिनेट का प्रस्ताव
बैठक में आपातकाल को लेकर एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल उन सभी लोगों के संघर्ष और बलिदान को नमन करता है, जिन्होंने 1975 में लगाए गए आपातकाल और संविधान की मूल भावना के खिलाफ हुई कार्रवाई का साहसपूर्वक विरोध किया।
प्रस्ताव में कहा गया कि 2025 में ‘संविधान हत्या दिवस’ के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो भारत के लोकतंत्र का एक काला अध्याय था। कैबिनेट ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और युवाओं से आग्रह किया कि वे तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष करने वालों से प्रेरणा लें।
पुणे मेट्रो विस्तार को मंजूरी
कैबिनेट ने पुणे मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है, जिसमें 12.75 किलोमीटर लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर (2A और 2B) शामिल हैं। इन पर कुल 13 स्टेशन बनाए जाएंगे और इस परियोजना की लागत लगभग 3626.24 करोड़ रुपये होगी। यह प्रोजेक्ट चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसका खर्च केंद्र, महाराष्ट्र सरकार और बाहरी एजेंसियों द्वारा साझा किया जाएगा।
झरिया पुनर्वास परियोजना को स्वीकृति
कैबिनेट ने झरिया कोलफील्ड क्षेत्र में आग और भूमि धंसाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए 5,940.47 करोड़ रुपये के संशोधित मास्टर प्लान को मंजूरी दी है। इस परियोजना से झरिया क्षेत्र में लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।
आगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र
एक अन्य अहम फैसले में, उत्तर प्रदेश के आगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जिस पर 111.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह केंद्र आलू और शकरकंद जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगा और किसानों की आय में वृद्धि का माध्यम बनेगा।
शुभांशु शुक्ला के मिशन पर कैबिनेट की बधाई
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के सफल मिशन की जानकारी दी और इस उपलब्धि पर पूरे मंत्रिमंडल ने करतल ध्वनि से बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।
इन फैसलों के साथ कैबिनेट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार देश की लोकतांत्रिक नींव को मजबूत करने के साथ-साथ विकास योजनाओं को भी प्राथमिकता दे रही है।