नई दिल्ली: कल भारत और पाकिस्तान एशिया कप के एक हाई-वोल्टेज मुकाबले में आमने-सामने होंगे, लेकिन इससे पहले सियासी पारा चढ़ गया है। इस मैच को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पाकिस्तान के साथ यह मुकाबला क्यों खेला जा रहा है। क्रिकेट की पिच पर खेल से ज्यादा सियासत की गूंज सुनाई दे रही है, जहां विपक्ष सरकार पर तीखे सवालों के बाउंसर फेंक रहा है और भाजपा को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ रहा है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या यह मैच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में खेला जा रहा है। उन्होंने लिखा, “क्या यह भी ट्रम्प के दबाव में हो रहा है? आखिर ट्रम्प के आगे कितना झुकोगे?” उनके इस बयान ने सियासी बहस को और हवा दी।
वहीं, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने सरकार का बचाव करते हुए कहा, “जब एसीसी या आईसीसी जैसे बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित होते हैं, तो देशों के लिए उनमें भाग लेना अनिवार्य हो जाता है। अगर हम हिस्सा नहीं लेते, तो टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ता है और दूसरी टीम को अंक मिल जाते हैं।” उन्होंने इसे खेल की मजबूरी करार दिया।
मैच के विरोध में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान बताते हुए पूरे महाराष्ट्र में सड़कों पर उतरकर विरोध करने की घोषणा की। ठाकरे ने कहा, “एक आतंकवादी देश के साथ क्रिकेट खेलना देश की भावनाओं के खिलाफ है। शिवसेना कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और इस मैच का पुरजोर विरोध करेंगे।”
यह विवाद भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैचों की संवेदनशीलता को फिर से उजागर करता है, जहां खेल और सियासत का घालमेल हमेशा चर्चा का विषय बनता है।