नई दिल्ली: वीर बाल दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने साहिबजादों को दी श्रद्धांजलि

New Delhi: Prime Minister Modi paid tribute to the Sahibzadas on Veer Bal Diwas.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीर बाल दिवस के अवसर पर सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के वीर पुत्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इस दिन को सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने और साहस व आस्था को नमन करने का अवसर बताया।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि वीर बाल दिवस बहादुर साहिबजादों के बलिदान को याद करने के लिए समर्पित श्रद्धा का दिन है। उन्होंने माता गुजरी जी के अटूट विश्वास और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की अमर शिक्षाओं को भी स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिवस साहस, दृढ़ आस्था और धर्मपरायणता का प्रतीक है और साहिबजादों का जीवन व आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी वीर साहिबजादों के अमर बलिदान को नमन करते हुए कहा कि कम आयु में भी उन्होंने धर्म, सत्य और साहस की जो मिसाल पेश की, वह युगों-युगों तक प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पर लिखा कि वीर बाल दिवस देश, धर्म और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु गोबिंद सिंह महाराज के चारों साहिबजादों की अमर शहादत को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी में संस्कार, साहस और राष्ट्रबोध के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस की शुरुआत इसी भावना के साथ की गई कि साहिबजादों का अद्वितीय त्याग देश की चेतना और भविष्य की दिशा बने।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी वीर बाल दिवस पर साहिबजादों को नमन करते हुए कहा कि उनका अदम्य साहस, त्याग और देशप्रेम अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति देता है और यह युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।

गौरतलब है कि वीर बाल दिवस हर वर्ष 26 दिसंबर को गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे पुत्र साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की शहादत के सम्मान में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी 2022 को गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी। दोनों साहिबजादों का जन्म आनंदपुर साहिब में हुआ था और 1705 में चमकौर की लड़ाई के बाद उन्हें उनकी दादी माता गुजरी के साथ मुगल अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिया गया था।

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