नई दिल्ली: भारत ने अपनी वायु सुरक्षा क्षमता को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में रूस से 288 नई S-400 मिसाइलों की खरीद को स्वीकृति दे दी गई। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 10,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
यह फैसला मई 2025 में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उपयोग की गई मिसाइलों के स्टॉक को फिर से भरने और देश की एयर डिफेंस प्रणाली को और मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित खरीद में 120 कम दूरी और 168 लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं, जिन्हें फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत हासिल किया जाएगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखी S-400 की ताकत
मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय वायुसेना ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का व्यापक इस्तेमाल किया था। रक्षा सूत्रों का दावा है कि इस ऑपरेशन में दुश्मन के लड़ाकू विमान, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को निशाना बनाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, S-400 की तैनाती के बाद सीमा पार हवाई गतिविधियों पर असर देखा गया। अदमपुर और भुज सेक्टर में इसकी मौजूदगी को रणनीतिक रूप से अहम माना गया।
जून और नवंबर में मिलेंगे अतिरिक्त सिस्टम
रूस के साथ पहले से हुए समझौते के तहत भारत को इस वर्ष जून और नवंबर में दो और S-400 सिस्टम मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा वायुसेना ने S-400 की सुरक्षा और कम दूरी के खतरों से निपटने के लिए रूसी ‘पैंटसिर’ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का भी प्रस्ताव दिया है, जिसे ड्रोन और कामिकाज ड्रोन हमलों के खिलाफ प्रभावी माना जाता है।
3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को स्वीकृति
DAC की बैठक में कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) प्रदान की गई। इनमें राफेल लड़ाकू विमान, विभिन्न कॉम्बैट मिसाइलें और हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट शामिल हैं।
सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत अधिकांश लड़ाकू विमानों का निर्माण देश में ही करने पर जोर दिया है। इसके अलावा एंटी-टैंक माइन्स (विभव), टैंकों और BMP-II जैसे लड़ाकू वाहनों के ओवरहाल तथा लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान P-8I की खरीद को भी हरी झंडी दी गई है।
अब रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के अगले चरण में कीमतों पर बातचीत होगी और अंतिम मंजूरी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से ली जाएगी।