अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितता मामले में जांच अब आगे बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को 15 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है। SIT अब इस अवधि में मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी।
मामले में पहले SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच में कुछ व्यवस्थागत कमियों और प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा किया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है ताकि दान राशि, चढ़ावे और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी सामने आ सके।
SIT को क्यों मिला अतिरिक्त समय?
जांच टीम को शुरुआत में सीमित समय के भीतर रिपोर्ट तैयार करनी थी, लेकिन मामले की गंभीरता और उससे जुड़े दस्तावेजों की संख्या को देखते हुए अब जांच को और विस्तार दिया गया है। SIT अब वित्तीय रिकॉर्ड, दान प्रबंधन व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित लोगों से जुड़ी जानकारी की गहराई से जांच कर रही है।
पहली जांच में सामने आई थीं कुछ खामियां
SIT की शुरुआती जांच में कथित तौर पर दान राशि के प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था और रिकॉर्ड से जुड़े कुछ मुद्दों की जांच की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच टीम ने दान की गिनती, कर्मचारियों की प्रक्रिया, CCTV निगरानी और रिकॉर्ड मिलान जैसे पहलुओं पर सवालों की समीक्षा की।
8 लोगों पर दर्ज हो चुकी है FIR
इस मामले में जांच के बाद पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। आरोप दान राशि और चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी को लेकर लगाए गए हैं। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।
CCTV और सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में
SIT ने मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और CCTV निगरानी सिस्टम को भी जांच का हिस्सा बनाया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि दान संग्रह और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में कहीं कोई लापरवाही या नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।
चांदी और अन्य चढ़ावे को लेकर भी हुई जांच
मामले में सिर्फ नकद दान ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए अन्य चढ़ावे और कीमती वस्तुओं को लेकर भी सवाल उठे थे। SIT जांच में कुछ चांदी की वस्तुओं को लेकर उठी चर्चाओं की भी पड़ताल की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, टीम ने इस पहलू पर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
ट्रस्ट और प्रशासन की भूमिका पर भी नजर
मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। SIT का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितता हुई तो उसकी वजह क्या थी और क्या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई है। कुछ नेताओं ने निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है, जबकि सरकार की ओर से जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
अब आगे क्या होगा?
SIT को मिले अतिरिक्त 15 दिनों में टीम कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी जांच पूरी करेगी। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले में SIT जांच अब और विस्तृत हो गई है। सरकार की ओर से जांच टीम को अतिरिक्त समय दिया गया है ताकि दान, रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं से जुड़े सभी पहलुओं की पूरी जांच हो सके। अब नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों पर है, जिससे इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।