बंगाल में धर्म आधारित मानदेय योजनाएं बंद, नई सरकार का बड़ा फैसला

Religion-Based Stipend Schemes Halted in Bengal: New Government's Major Decision

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार ने धर्म आधारित मानदेय योजनाओं को बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को हुई कैबिनेट की दूसरी बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में कल्याणकारी योजनाएं धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं चलाई जाएंगी।

सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 जून से इमामों, मुअज्जिनों और पुरोहितों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। नई सरकार का कहना है कि धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता देना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार ने वर्ष 2012 में पंजीकृत इमामों और मुअज्जिनों के लिए मासिक भत्ता योजना शुरू की थी। बाद में मामला अदालत पहुंचने पर यह सहायता वक्फ बोर्ड के माध्यम से दी जाने लगी। वर्ष 2020 में हिंदू पुजारियों के लिए भी मानदेय योजना लागू की गई थी।

इसी वर्ष मार्च में राज्य सरकार ने इन मानदेयों में बढ़ोतरी की थी, जिसके तहत इमामों को 3,000 रुपये और मुअज्जिनों व पुरोहितों को 2,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे थे। अब नई सरकार ने इस योजना को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला लिया है।

इसके साथ ही राज्य सरकार ने Calcutta High Court के 2024 के फैसले के आधार पर मौजूदा ओबीसी सूची की समीक्षा और संशोधन का भी निर्णय लिया है। अदालत ने तृणमूल सरकार के दौरान शामिल किए गए 77 समुदायों को अमान्य करार दिया था, जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय बताए गए थे।

नई सरकार का कहना है कि राज्य में योजनाएं जाति या धर्म के बजाय जरूरत और सामाजिक कल्याण के आधार पर संचालित की जाएंगी। वहीं राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को बंगाल की राजनीति में बड़े वैचारिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

ये खबरें भी अवश्य पढ़े

Leave a Comment