बिहार बजट पर रोहिणी आचार्य का हमला, बोलीं—खर्च और क्रियान्वयन सबसे बड़ी कमजोरी

Rohini Acharya attacked the Bihar budget, saying that spending and implementation are its biggest weaknesses.

बिहार : नीतीश सरकार ने मंगलवार को बिहार का 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा अक्सर खर्च ही नहीं हो पाता और सरकार सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी में उलझी रहती है।

रोहिणी आचार्य ने अपने लंबे पोस्ट में कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास और जनकल्याण के सूचकों का सतत मूल्यांकन आज बिहार की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन प्रस्तुत बजट इस अहम पहलू पर मौन है। उन्होंने कहा कि बजट पेश कर आत्मश्लाघा करने से पहले सरकार को यह समझना चाहिए कि बिना बुनियादी सेवाओं, समान अवसर और रोजगार सृजन के विकास का दावा खोखला साबित होगा।

उन्होंने डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि लोगों को अधिकार के रूप में बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं, गैर-बराबरी की खाई कम नहीं हुई और श्रमिकों का पलायन यूं ही जारी रहा, तो विकास के दावे ज्यादा दिन टिक नहीं पाएंगे।

रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल है। हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों से राज्य की विकास दर में गिरावट दर्ज की जा रही है और बीते दस वर्षों में लगभग 250 कारखाने बिहार से अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो चुके हैं।

नीतीश कुमार के करीब 20 वर्षों के शासनकाल की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के बजट के आकार और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर रहा है। उनका आरोप है कि कई बड़ी केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्य सरकार समय पर प्रस्ताव तक नहीं भेजती, केंद्र से मिलने वाली राशि का उपयोग नहीं हो पाता और यदि राशि खर्च होती भी है, तो उसका समुचित लेखा-जोखा नहीं दिया जाता।

उन्होंने हाल ही में सीएजी द्वारा उजागर कथित 72 हजार करोड़ रुपये के मामले का जिक्र करते हुए सरकार पर लचर अर्थ-प्रबंधन और संस्थागत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। रोहिणी आचार्य ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि बिहार का बजट अक्सर खोखली घोषणाओं का पुलिंदा बनकर रह जाता है और राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बजटीय प्रावधानों का वास्तविक और प्रभावी क्रियान्वयन सबसे जरूरी है।

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