लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष के जोरदार हंगामे और अनुशासनहीनता के चलते स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा रुख अपनाया। सदन में स्पीकर के आसन की ओर कागज के टुकड़े फेंकने और अभद्र आचरण के आरोप में विपक्ष के 8 सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी, जिसके चलते इसे बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोपहर 3 बजे कार्यवाही शुरू होते ही इन सांसदों के निलंबन का प्रस्ताव सदन में रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
राहुल गांधी के चीन मुद्दे से बढ़ा विवाद
सदन में हंगामे की शुरुआत उस वक्त हुई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान चीन से जुड़े मुद्दे को उठाया। राहुल गांधी अपनी बात पूरी करने पर अड़े रहे, लेकिन सत्ता पक्ष के विरोध और शोरगुल के चलते उनका भाषण बाधित हो गया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई, जब नारेबाजी करते हुए विपक्षी सांसद वेल में आ गए और स्पीकर के आसन की ओर फटे हुए कागज उछालने लगे। इस अव्यवस्था के चलते सदन की कार्यवाही दिन में कई बार स्थगित करनी पड़ी।
इन सांसदों को किया गया निलंबित
स्पीकर द्वारा निलंबित किए गए 8 सांसदों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हैं। निलंबन की कार्रवाई जिन सांसदों पर हुई, उनमें गुरजीत औजला, मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, किरण कुमार रेड्डी, डीन कुरियाकोस, एस. वेंकटेश (सीपीएम), हिबी ईडन और प्रशांत पडोले शामिल हैं। सरकार का कहना है कि संसदीय आसन का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है, इसलिए यह सख्त कदम उठाया गया।
कांग्रेस का पलटवार: पूरे विपक्ष को सस्पेंड करने की चुनौती
निलंबन की कार्रवाई से पहले कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विरोध कर रहे सांसदों का बचाव करते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। वेणुगोपाल ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसमें साहस है तो वह सिर्फ चुनिंदा सांसदों को नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष को निलंबित करके दिखाए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संसद में उनकी बात रखने से रोक रही है।