- वैशाली, रुपेश कुमार सिंह की रिपोर्ट
देश में भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार हो गया है, आए दिन सरकारी संवैधानिक पद पर बैठे कर्मचारियों और नेता अपने सात पीढ़ी की व्यवस्था करने में लगे हैं। उसी भ्रष्टाचार के खेल में कुछ नई खिलाड़ी छोटी मछली भी फंसती जा रही है। बिहार में तो कहना नहीं सभी निचले स्तर के कर्मचारियों को अपने आका तक राशि देनी होती है, जिसे पूरा करने के लिए दिन रात अपने और अपने उपर के अधिकारियों के साथ धन शोधन में लगे निचले कर्मचारियों आज दिन निगरानी के हत्थे चढ़ रहे हैं।
उसी कड़ी में रिश्वतखोरी के एक मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, पटना ने वैशाली जिले के हाजीपुर नगर थाना की तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) पूनम कुमारी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
यह सजा विशेष निगरानी इकाई थाना के मामले में पहली सजा मिला है। सजा के अलावा न्यायालय ने उन पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीन माह की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
ज्ञात हो कि पूनम कुमारी केस में लाभ दिलाने के लिए पीड़ित परिवार से राशि ले रही थी उसी दौरान निगरानी के हाथ पूनम कुमारी लग गई थी, उस दौरान पूनम कुमारी निगरानी के सामने खूब रोने गाने का नाटक कर रही थी।