सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ईवीएम के सत्यापन पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Supreme Court's big decision, sought answer from Election Commission on EVM verification

नई दिल्ली: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को ईवीएम की बर्न्ट मेमोरी की जांच के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाने का निर्देश दिया जाए। मंगलवार को इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा और यह आदेश दिया कि फिलहाल, ईवीएम से कोई भी डेटा डिलीट नहीं किया जाए और न ही कोई डेटा रीलोड हो।

कोर्ट के पहले फैसले का हवाला
एडीआर की याचिका में पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले का हवाला दिया गया था। उस फैसले में कोर्ट ने बैलेट पेपर से चुनाव की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने से मना कर दिया था और वीवीपैट की सभी पर्चियों को गिनने की मांग को भी ठुकरा दिया था। हालांकि, कोर्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चुनाव परिणाम घोषित होने के एक हफ्ते के भीतर ईवीएम की बर्न्ट मेमोरी की जांच की अनुमति दी थी।

बर्न्ट मेमोरी जांच का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च 2024 के फैसले में कहा था कि नतीजे आने के एक सप्ताह के भीतर दूसरे या तीसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार ईवीएम की जांच की मांग कर सकता है। इसके लिए इंजीनियरों की एक टीम पांच माइक्रो कंट्रोलर की बर्न्ट मेमोरी की जांच करेगी। जांच का खर्च उम्मीदवार को उठाना होगा, लेकिन यदि गड़बड़ी साबित हुई तो यह खर्च उम्मीदवार को वापस कर दिया जाएगा।

याचिका में उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दे
एडीआर की याचिका में यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग के मौजूदा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) में केवल ईवीएम की बेसिक जांच और मॉक पोल्स का ही निर्देश है। आयोग ने अब तक बर्न्ट मेमोरी की जांच के लिए कोई प्रोटोकॉल नहीं बनाया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि चुनाव आयोग ईवीएम के चारों हिस्सों- कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट, वीवीपैट और सिंबल लोडिंग यूनिट के माइक्रो कंट्रोलर की जांच के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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