मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी कंपनी को भारत के नियम-कानून स्वीकार नहीं हैं, तो उसे यहां काम करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि डेटा शेयरिंग के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत व्हाट्सएप को उपयोगकर्ताओं की एक भी जानकारी किसी अन्य कंपनी के साथ साझा करने की अनुमति नहीं देगी। व्हाट्सएप की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया…
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