कुख्यात अपराधी छोटू नट और उसके सहयोगी गोविंद कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, छोटू नट का पूरा परिवार वर्षों से डकैती, लूट और चोरी को सुनियोजित तरीके से अंजाम देता आ रहा था।
जांच में पता चला है कि इस गिरोह में परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियों में बंटे हुए थे। कोई इलाके की रेकी करता था, कोई वारदात को अंजाम देता था, तो कोई लूट के सामान को ठिकाने लगाने का काम करता था। इसी संगठित ढांचे के कारण गिरोह की गतिविधियां कई थानों और जिलों तक फैल चुकी थीं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस आपराधिक नेटवर्क में महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। छोटू नट की पत्नी पहले भी जेल जा चुकी है, जबकि उसके पिता, साले और परिवार के अन्य सदस्य भी डकैती और लूट के मामलों में नामजद रहे हैं। यहां अपराध किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक रणनीति बन चुका था।
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह किसी भी वारदात से पहले पूरी योजना बनाता था। कौन सा घर बंद है, कहां पुलिस की गश्त कम है, किस समय वारदात को अंजाम देना आसान होगा—इन सभी बिंदुओं का बारीकी से आकलन किया जाता था। इसी वजह से यह गिरोह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर बना रहा।
मामले में अवैध संपत्ति का पहलू भी सामने आया है। पुलिस को जानकारी मिली है कि छोटू नट के पास तीन से चार मंजिला पक्का मकान है, जबकि उसकी आय का कोई वैध स्रोत सामने नहीं आया है। अब पुलिस इस संपत्ति की वित्तीय जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अपराध से अर्जित धन का निवेश कहां-कहां किया गया।
यह मामला केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि एक सामाजिक विफलता की ओर भी इशारा करता है, जहां अपराध पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता गया। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह की गिरफ्तारी से जिले में हुई कई अनसुलझी डकैती और लूट की वारदातों का खुलासा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।