ईरान-इजराइल तनाव का असर बिहार तक, गैस सिलेंडर की किल्लत से लोग परेशान; Rohini Acharya ने Narendra Modi पर साधा निशाना

The Iran-Israel tensions have reached Bihar, with gas cylinder shortages troubling residents; Rohini Acharya targets Narendra Modi.

पटना: मध्य-पूर्व में बढ़ते Iran–Israel conflict का असर अब बिहार में भी देखने को मिल रहा है। राज्य में घरेलू रसोई गैस की कमी से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि पिछले तीन दिनों से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग भी बंद बताई जा रही है।

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और हॉस्टल संचालकों पर खासा असर पड़ा है। कई जगहों पर गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण होटल और ढाबे बंद करने की नौबत आ गई है।

रोहिणी आचार्य का प्रधानमंत्री पर तंज
इस मुद्दे को लेकर राजद प्रमुख Lalu Prasad Yadav की बेटी Rohini Acharya ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सिलेंडर की किल्लत का जश्न कब मनाया जाएगा, प्रधानमंत्री जी?

उन्होंने व्यंग्य करते हुए लिखा कि “प्रधानमंत्री लाइन लगवाओ योजना (PMLLY) के तहत पहले नोट बदलने के लिए लाइन लगवाई गई, फिर ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए और अब गैस सिलेंडर के लिए लाइन लगवाई जा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा और संकट की स्थितियों को भी सरकार कार्यक्रम और इवेंट में बदल देती है।

गैस के लिए कतारों में लोग
इधर बिहार के कई इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद कई लोगों को गैस नहीं मिल पा रही है। मोबाइल के जरिए गैस सिलेंडर की बुकिंग भी बंद होने की शिकायत सामने आ रही है। हालांकि सरकारी अधिकारी गैस की कमी से इनकार करते हुए लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दे रहे हैं।

कालाबाजारी के आरोप
आम लोगों का आरोप है कि गैस की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। पटना में रहने वाले कुछ लोगों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि जो गैस सामान्यतः लगभग 90 रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसे अब 300 रुपये प्रति किलो तक में सिलेंडरों में भरवाया जा रहा है।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उनके पास गैस की सप्लाई ही नहीं पहुंच रही है, इसलिए वे छोटे सिलेंडरों में गैस भरकर बेचने में असमर्थ हैं। हालात से परेशान होकर पटना में रहकर पढ़ाई करने वाले कई छात्र अपने-अपने गांव लौटने लगे हैं। उनका कहना है कि गांव में कम से कम जलावन की व्यवस्था हो जाती है, जबकि शहर में गैस के बिना गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

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