दूध में मिलावट रोकने के लिए बड़ा फैसला, Food Safety and Standards Authority of India ने उत्पादन और बिक्री के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया

In a major decision to prevent adulteration of milk, the Food Safety and Standards Authority of India has made licensing mandatory for production and sale.

नई दिल्ली: देश में दूध में मिलावट की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए Food Safety and Standards Authority of India (एफएसएसएआई) ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए दूध उत्पादन और बिक्री के लिए लाइसेंस या पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है।

सरकारी एजेंसी द्वारा जारी बयान के अनुसार, डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़कर सभी दूध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को अपने खाद्य व्यवसाय का संचालन शुरू करने से पहले एफएसएसएआई के साथ अनिवार्य रूप से पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

एफएसएसएआई ने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य दूध में मिलावट की घटनाओं पर रोक लगाना, खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को मजबूत करना तथा दूध के सुरक्षित भंडारण और स्वच्छ आपूर्ति को सुनिश्चित कर जनस्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विशेष पंजीकरण अभियान चलाने और प्रवर्तन जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जारी नोट में कहा गया है कि देश के विभिन्न राज्यों में दूध में संभावित मिलावट की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पंजीकरण और लाइसेंसिंग की आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन कराया जाए। इसके लिए केंद्र और राज्यों की प्रवर्तन एजेंसियों से दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लाइसेंस तथा पंजीकरण का सत्यापन करने को कहा गया है। साथ ही राज्यों को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष पंजीकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास एफएसएसएआई का वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र या लाइसेंस मौजूद हो।

सांसद राघव चड्ढा ने संसद में उठाया था मिलावट का मुद्दा
इससे पहले Raghav Chadha ने संसद में खाद्य पदार्थों में मिलावट का मुद्दा उठाते हुए कई कंपनियों पर सेहतमंद और ऊर्जा बढ़ाने वाले झूठे दावों के साथ हानिकारक उत्पाद बेचने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में खतरनाक मिलावट की जा रही है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और कृत्रिम रंग मिलाए जा रहे हैं। इसके अलावा खाने के तेल में मशीन का तेल, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा, चाय में सिंथेटिक रंग तथा पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाने की बात भी सामने आई है। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगह देशी घी से बनने वाली मिठाइयों में भी वनस्पति तेल और डालडा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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