अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए भक्तों का निरंतर सैलाब उमड़ रहा है। रोजाना हजारों भक्त अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन कर रहे हैं। हाल ही में प्रयागराज में संपन्न हुए महाकुंभ के दौरान भी लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे। इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने एक बड़ा निर्णय लिया है। ट्रस्ट के अनुसार अब राम मंदिर में मुख्य पुजारी का कोई पद नहीं होगा। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस फैसले का ऐलान किया।
चंपत राय ने बताया कि यह निर्णय आचार्य सत्येंद्र दास के सम्मान में लिया गया है। आचार्य सत्येंद्र दास, जो कि राम मंदिर के मुख्य पुजारी थे, हाल ही में निधन हो गए थे।
महासचिव चंपत राय का बयान
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा, “हमने छह महीने पहले ही आचार्य सत्येंद्र दास से पूछा था कि अब कोई मुख्य पुजारी नहीं होगा। आचार्य सत्येंद्र दास का सम्मान और उनकी आयु को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। वह हनुमानगढ़ी के महंत रहे थे और उनके जैसे विद्वान कोई नहीं है। इसलिए अब किसी को मुख्य पुजारी बनाना उचित नहीं होगा।”
चंपत राय ने यह भी बताया कि आचार्य सत्येंद्र दास 1993 से रामलला की सेवा कर रहे थे और उन्हें महीने में मात्र 100 रुपये वेतन मिलता था। उनकी सेवा अर्पण की भावना की वजह से ही मंदिर ट्रस्ट ने यह निर्णय लिया।
आचार्य सत्येंद्र दास का परिचय
आचार्य सत्येंद्र दास अयोध्या में विवादित ढांचे के ध्वस्त होने से लेकर राम मंदिर के निर्माण तक की यात्रा के साक्षी रहे। वह 1993 से रामलला की सेवा में लगे हुए थे और रामलला की पूजा टेंट से लेकर भव्य मंदिर में उनकी प्रतिष्ठा तक करते रहे।
आचार्य सत्येंद्र दास का जन्म 1975 में हुआ था और उन्होंने संस्कृत में आचार्य की डिग्री ली। इसके बाद वह अयोध्या के संस्कृत महाविद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हुए। 1992 में उन्हें रामलला का पुजारी नियुक्त किया गया।
आचार्य सत्येंद्र दास ने रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद भी कार्यमुक्त होने का निवेदन किया था, लेकिन राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने इसे अस्वीकार करते हुए उन्हें मुख्य पुजारी बने रहने की बात कही थी।