नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति ने वैश्विक वित्तीय बाजारों का माहौल बदल दिया है। लंबे समय से जारी तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से सामान्य रूप से खुलने की उम्मीदों ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है। इसके साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हो सकती हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है और निवेशकों का रुझान जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ा है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी
ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। बाजार को उम्मीद है कि तेल आपूर्ति पर पड़ा दबाव कम होगा और वैश्विक सप्लाई चेन फिर से सामान्य हो सकेगी।
भारत जैसे देशों के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। तेल सस्ता होने से आयात बिल, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
एशियाई बाजारों में जबरदस्त उत्साह
समझौते की उम्मीदों का असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। जापान के निक्केई और दक्षिण कोरिया के कोस्पी समेत कई प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों ने इसे वैश्विक आर्थिक स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत माना है।
विश्लेषकों के अनुसार भू-राजनीतिक तनाव कम होने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिसका फायदा उभरते बाजारों को भी मिलता है।
भारतीय बाजार को मिल सकता है फायदा
वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को घरेलू बाजार के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
विशेष रूप से तेल पर निर्भर उद्योगों, पेंट, टायर, एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों को इससे लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इन क्षेत्रों की लागत कम होने से मुनाफे में सुधार देखने को मिल सकता है।
निवेशकों की नजर समझौते के अंतिम चरण पर
हालांकि बाजार में उत्साह का माहौल है, लेकिन विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि अभी समझौते की कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं बाकी हैं और अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
इसके बावजूद फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी और निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने वित्तीय बाजारों में नई ऊर्जा भर दी है। यदि शांति प्रक्रिया सफल रहती है तो आने वाले दिनों में इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों पर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।