नई दिल्ली: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 135 दवाओं के सैंपल फेल करार दिए हैं। इनमें हृदय रोग, शुगर, किडनी, उच्च रक्तचाप (बीपी) और एंटीबायोटिक्स जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां शामिल हैं।
दवाओं का गुणवत्ता परीक्षण में फेल होना
पिछले कुछ महीनों से दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। यह समस्या देश की कई बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा निर्मित दवाओं में पाई गई है। क्वालिटी टेस्ट में फेल हुई इन दवाओं को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है।
मुख्य फेल दवाओं की सूची
फेल हुई दवाओं में निम्नलिखित प्रमुख दवाएं शामिल हैं:
सेफपोडोक्साइम टैबलेट आईपी 200-एमजी (एंटीबायोटिक)
डाइवैलप्रोएक्स एक्सटेंडेड-रिलीज टैबलेट (माइग्रेन और न्यूरोलॉजिकल रोग)
मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोर टैबलेट (डायबिटीज)
जिंक सल्फेट टैबलेट
एमोक्सीमून सीवी-625 (एंटीबायोटिक)
पेरासिटामोल 500 एमजी (बुखार और दर्द)
मैरोपेनम इंजेक्शन (शमश्री लाइफ साइंसेस)
टेल्मीसार्टन (हाई बीपी)
एल्बेंडाजोल (मार्टिन एंड ब्राउन कंपनी)
लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू
केंद्रीय प्रयोगशालाओं ने 51 और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 84 सैंपल फेल पाए। इसके चलते इन दवाओं के निर्माताओं के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
फिक्स डोज दवाओं पर भी नजर
सरकार पहले ही 206 फिक्स डोज दवाओं (FDC) पर बैन लगा चुकी है। इनमें कई हानिकारक दवाओं को स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया गया था। अब 135 नई दवाएं फेल होने के बाद, इनकी कुल संख्या 300 के पार पहुंच गई है।
सरकार की सख्त कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग्स एडवाइजरी बोर्ड ने दवाओं की गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि हानिकारक दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह खबर दवा उद्योग और मरीजों के लिए चिंताजनक है। फेल दवाओं का उपयोग रोकने और सुरक्षित विकल्प चुनने की सलाह दी गई है।