इस्कॉन पुजारी चिन्मय कृष्ण दास को मिली जमानत, छह महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

ISKCON priest Chinmay Krishna Das gets bail, paves way for release from jail after six months

ढाका: बांग्लादेश की जेल में पिछले छह महीनों से बंद इस्कॉन के पुजारी चिन्मय कृष्ण दास को बड़ी राहत मिली है। देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए गए चिन्मय कृष्ण दास को ढाका हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। यह फैसला आज की सुनवाई में आया, जिसमें उनके वकील ने प्रभावी तरीके से पैरवी की।

पिछले वर्ष नवंबर में चिन्मय दास की गिरफ्तारी हुई थी। हाल ही में चटगांव मेट्रोपोलिटन सेशन जज मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके पास किसी वकील का “लेटर ऑफ अटॉर्नी” नहीं है। इसके बाद बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता रवींद्र घोष ने व्यक्तिगत रूप से चटगांव जाकर चिन्मय कृष्ण दास की ओर से याचिका दायर की और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

चिन्मय कृष्ण दास, चटगांव के सातकानिया उपजिला के निवासी हैं और अपने धार्मिक उपदेशों और प्रवचनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। कम उम्र में ही वे एक लोकप्रिय वक्ता के रूप में उभरे और उन्हें “शिशु वक्ता” का उपनाम भी मिला। उन्होंने 2016 से 2022 तक इस्कॉन चटगांव के सचिव के रूप में सेवा दी और साथ ही वे 2007 से हाथाजारी के पुंडरिक धाम के प्रधान भी रहे हैं।

अब जमानत मिलने के बाद चिन्मय दास के समर्थकों और इस्कॉन समुदाय में राहत की भावना है। यह फैसला बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों से जुड़ी एक अहम कानूनी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

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