पटना : बिहार सरकार ने राज्य में तेजी से घट रही देसी मछलियों की प्रजातियों के संरक्षण और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को देसी मछली पालन के लिए परियोजना लागत पर 60 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
किन गतिविधियों पर मिलेगा अनुदान
योजना के तहत माइनर कार्प (छोटी देसी मछलियां), कैट फिश, वायु-श्वासी मछलियों का पालन, झींगा (श्रिंप) पालन और मोती उत्पादन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन प्रजातियों के वैज्ञानिक पालन से जैव विविधता का संरक्षण होगा और बाजार में अच्छी मांग वाली देसी मछलियों का उत्पादन भी बढ़ेगा।
31 अगस्त तक ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन
इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसान और मछली पालक केवल ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन बिहार मत्स्य निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकता है। योजना का लाभ पूरे बिहार के सभी 38 जिलों में उपलब्ध होगा।
पट्टे के तालाबों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ निजी तालाबों के साथ-साथ पट्टे पर लिए गए सरकारी या निजी जलाशयों में मछली पालन करने वाले लाभार्थियों को भी मिलेगा। इसके अलावा बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक हैचरी तकनीक से तैयार उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। एक परिवार या व्यक्ति को योजना के तहत केवल एक घटक पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से विलुप्त होती देसी मछलियों का संरक्षण होगा और मत्स्य पालन को नए आय के स्रोत के रूप में बढ़ावा मिलेगा। आधुनिक तकनीक और सरकारी सहायता के जरिए किसान पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।