हिंद महासागर में भारत-इंडोनेशिया की बड़ी रणनीतिक साझेदारी, सबांग पोर्ट और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से बढ़ेगी समुद्री ताकत

India-Indonesia's major strategic partnership in the Indian Ocean, Sabang Port and Great Nicobar Project will enhance maritime power

नई दिल्ली: भारत और इंडोनेशिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास और भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट को आपस में जोड़ने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। यह पहल समुद्री व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

मलक्का जलडमरूमध्य पर बढ़ेगी रणनीतिक पकड़

सबांग पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार के बेहद करीब स्थित है, जबकि भारत का ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भी इसी समुद्री क्षेत्र के निकट विकसित किया जा रहा है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल इस जलडमरूमध्य से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में दोनों परियोजनाओं का विकास भारत की समुद्री निगरानी और रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेगा।

व्यापार और सुरक्षा दोनों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग पोर्ट और ग्रेट निकोबार परियोजना के विकसित होने से भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापारिक संपर्क बेहतर होगा। इसके साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों का सहयोग बढ़ेगा। यह पहल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है।

रक्षा और तकनीकी सहयोग भी होगा मजबूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की वार्ता के दौरान रक्षा, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में कई समझौतों पर सहमति बनी। दोनों देशों ने समुद्री सहयोग को व्यापक बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी जताई।

हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका होगी और मजबूत

सबांग पोर्ट और ग्रेट निकोबार परियोजना को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारत न केवल समुद्री व्यापार में अपनी भूमिका मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की निगरानी में भी उसकी क्षमता पहले से कहीं अधिक बढ़ेगी।

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