बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बांदा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हिंदू समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल मुसलमानों को कोसने या गाली देने से भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता, इसके लिए हिंदू समाज को पहले अपनी आंतरिक कमजोरियों और कुरीतियों को खत्म करना होगा।
शुक्रवार को खुरहंड स्टेशन स्थित सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आवास पर सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भक्तों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दूसरे धर्मों को निशाना बनाकर लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। हिंदू राष्ट्र का मार्ग समाज सुधार से होकर गुजरता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सनातन धर्म की कमियों को दूर करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने नारा दिया— “जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।”
अपने चिर-परिचित अंदाज में धीरेंद्र शास्त्री ने तलाक और वैवाहिक कानूनों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने तुलनात्मक रूप से कहा कि जहां कुछ समुदायों में केवल तीन बार कहने से तलाक हो जाता है, वहीं हिंदू समाज में तलाक की प्रक्रिया लंबी और अदालतों की कई पेशियों से गुजरती है। उन्होंने संकेतात्मक रूप से कहा कि नियमों के दायरे में रहने से ही समाज को लाभ होता है।
धार्मिक आस्था पर बोलते हुए उन्होंने हिंदुओं को भटकाव से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि हनुमान जी की कृपा चाहते हैं, तो उन पर पूर्ण विश्वास रखना होगा। मजारों पर चादर चढ़ाने या मोमबत्ती जलाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इधर-उधर भटकने से आस्था कमजोर होती है। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि पूरी निष्ठा के साथ भगवान पर भरोसा रखें, क्योंकि सच्ची श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाती।