पटना: 23 जुलाई का दिन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस दिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट उस बहुचर्चित IRCTC होटल टेंडर घोटाले में अपना फैसला सुनाएगी, जिसमें लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वी यादव समेत कई अन्य लोग आरोपी हैं।
क्या है मामला?
यह मामला उस समय का है जब लालू यादव 2005-06 में रेल मंत्री थे। उस दौरान रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटल्स को बेहतर प्रबंधन के लिए IRCTC के तहत लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। CBI का आरोप है कि इस टेंडर प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं बरती गईं और सुजाता होटल्स नामक कंपनी, जिसे विनय कोचर संचालित करते थे, को लाभ पहुंचाया गया।
क्या थे आरोप?
CBI के अनुसार, इन होटलों की लीज के बदले में कोचर बंधुओं ने पटना में तीन एकड़ जमीन लालू परिवार से जुड़ी सरला गुप्ता की कंपनी को बेची, जिसका मालिकाना हक बाद में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की कंपनी के पास चला गया। बताया गया कि इसी जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बनाने की योजना थी।
कब और कैसे शुरू हुई जांच?
इस मामले में CBI ने 17 जुलाई 2017 को लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसके बाद देशभर में 12 ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। फिलहाल, तेजस्वी यादव 2019 से जमानत पर हैं, वहीं राबड़ी देवी को भी कोर्ट से राहत मिल चुकी है।
कोर्ट का फैसला 23 जुलाई को
गुरुवार को हुई अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसे अब 23 जुलाई को सुनाया जाएगा। अगर CBI अदालत में आरोप साबित कर देती है, तो आरोपियों को अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती है।
अब सभी की निगाहें 23 जुलाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि लालू परिवार इस भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिए जाते हैं या नहीं। यह फैसला राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के संदर्भ में।