नई दिल्ली: अब किसी भी घर में सीसीटीवी कैमरा लगाने से पहले वहां रहने वाले सभी सदस्यों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। यह महत्वपूर्ण फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि बिना अनुमति कैमरे लगाना निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
यह निर्णय दो भाइयों के बीच चल रहे विवाद की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें एक पक्ष ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता का सम्मान करना हर किसी का दायित्व है, और किसी के भी निजी जीवन में दखल नहीं दिया जा सकता—even सुरक्षा के नाम पर भी।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि सीसीटीवी कैमरे लगाने से पहले परिवार के सभी सदस्यों की लिखित सहमति आवश्यक है। यह फैसला देशभर में निजता के अधिकार को सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है।
यह निर्णय उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो बिना पूछे निजी स्थानों की निगरानी शुरू कर देते हैं। अब कानूनी रूप से ऐसा करना न केवल गलत है, बल्कि दंडनीय भी हो सकता है।