नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान को एक बार फिर भारत के कड़े रुख का सामना करना पड़ा है। पश्चिमी नदियों पर भारत द्वारा बनाई जा रही जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration) के हालिया फैसले को भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत ने साफ कहा है कि यह फैसला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और भारत ने कभी इस मध्यस्थता प्रक्रिया को मान्यता नहीं दी।
दरअसल, पाकिस्तान पिछले कुछ समय से यह दावा कर रहा था कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भारत को पश्चिमी नदियों—चिनाब, झेलम और सिंधु—का पानी बिना रोक-टोक पाकिस्तान को बहने देने का निर्देश दिया है। पाकिस्तान इसे सिंधु जल संधि (IWT) पर अपने पक्ष की “बड़ी जीत” बताकर प्रचारित कर रहा था।
लेकिन भारत ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान की इस खुशी पर पानी फेरते हुए कहा है कि उसने न तो इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया और न ही न्यायालय के किसी निर्णय को स्वीकार करता है। भारत का रुख है कि ऐसे मामलों के समाधान के लिए संधि के अनुसार “तटस्थ विशेषज्ञ” की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए, न कि मध्यस्थता का।
भारत ने पाकिस्तान को दिया याद दिलाने वाला संदेश
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया है कि जम्मू-कश्मीर की किशनगंगा और रतले जल विद्युत परियोजनाओं पर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को लेकर भारत पहले ही सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए नोटिस जारी कर चुका है।
भारत ने विश्व बैंक के उस फैसले को भी नहीं स्वीकार किया था, जिसमें उसने एक ही मुद्दे पर “तटस्थ विशेषज्ञ” और “मध्यस्थता न्यायालय” दोनों प्रक्रियाएं एक साथ शुरू कर दी थीं। अक्टूबर 2022 में भारत की आपत्ति के बावजूद विश्व बैंक ने यह कदम उठाया, जबकि भारत का कहना था कि यह कानूनी और व्यावहारिक रूप से उचित नहीं है।
आतंकवाद से निपटने पर भी जोड़ा दबाव
भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित हो रहे सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर कोई आगे की बातचीत संभव नहीं है। पुलवामा हमले के बाद भारत ने संधि के कई प्रावधानों को स्थगित कर दिया था।
एक ओर जहां पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि को पूरी तरह लागू करवाने की गुहार लगा रहा है, वहीं भारत ने विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को जोड़ते हुए पाकिस्तान पर राजनयिक दबाव और बढ़ा दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर भारत सरकार की विस्तृत और आधिकारिक प्रतिक्रिया जल्द ही जारी की जा सकती है।