जहानाबाद। जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सैयद कैसर आलम रिज़वी ने बड़ा दिल दिखाते हुए अपने लाचार बुजुर्गों और गरीब बच्चों के लिए एक अनूठा फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पुश्तैनी एक बीघा ज़मीन स्वतंत्रता सेनानी दादा के नाम पर वृद्धाश्रम और सातवीं से बारहवीं तक का स्कूल बनाने के लिए दान करने की घोषणा की है।
शहर की जाफरगंज रिज़वी कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में रिज़वी ने कहा,
“मेरे पास खुद निर्माण के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए मैंने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को ई-मेल भेजकर अपील की है कि वे सदर प्रखंड के किनारे पंचायत अंतर्गत सलेमपुर गांव में मेरी खानदानी रियासती मकान की एक बीघा ज़मीन पर वृद्धाश्रम और स्कूल बनवा दें।”
उन्होंने बताया कि जिले में अधिकांश गरीब बच्चे सातवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे बच्चों को 12वीं तक मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसी उद्देश्य से स्कूल बनवाना चाहते हैं। साथ ही बेसहारा और लाचार बुजुर्गों के लिए शरण स्थली (वृद्धाश्रम) बनना बेहद जरूरी है।
स्वतंत्रता सेनानियों का गौरवशाली परिवार
रिज़वी ने बताया कि उनके दादा हकीम सैयद तल्लुफ हुसैन और पिता सैयद मंजरुल हुसैन दोनों कट्टर स्वतंत्रता सेनानी थे। दादा मशहूर स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व विधायक स्वर्गीय फिदा हुसैन के बहनोई थे। 1922 में गया में हुए कांग्रेस के 27वें अधिवेशन में भाग लेने के लिए चित्तरंजन दास का पत्र भी उनके दादा को मिला था।
1947 में जब महात्मा गांधी जहानाबाद आए थे, तब वे उनके घर भी ठहरे थे। दादा का निधन 1929 में ही हो गया था, इसके बाद उनके पिता ने आज़ादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया और जेल भी गए।
आज़ादी के बाद पिता को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिली। 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली बुलाकर उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था।
रिज़वी ने भावुक अपील करते हुए कहा,
“मैं अपने दादा-पिता का नाम अमर करना चाहता हूँ। उनकी स्मृति में वृद्धाश्रम और स्कूल बने, यही मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश है। राहुल गांधी से गुजारिश है कि इस नेक काम में मेरी मदद करें।”
उन्होंने बिहार कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि दूसरे दलों से आने-जाने वालों को बार-बार टिकट देने और पार्टी छोड़कर जाने वालों को फिर शामिल करने की नीति बंद हो, तभी बिहार में कांग्रेस फिर खड़ी हो सकेगी।
कांग्रेस नेता की इस घोषणा और पुश्तैनी ज़मीन दान करने की पहल की क्षेत्र में भारी सराहना हो रही है।