डायबिटीज एक क्रोनिक बीमारी है, जिसमें शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर बढ़ने लगता है। यह स्थिति शरीर के लिए बेहद हानिकारक होती है। हालांकि, समय रहते डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है। इस संदर्भ में लिपिड टेस्ट के जरिए आप डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर (बीपी), कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का पता पहले ही लगा सकते हैं।
क्या कहती है रीसर्च?
हाल ही में, किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने बच्चों में डायबिटीज को पहचानने का एक नया तरीका खोजा है। इस शोध में भविष्य में लिपिड काउंटिंग के माध्यम से बच्चों में डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों के बारे में पहले से ही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस ब्लड टेस्ट में लिपिड की पहचान करके भविष्य में होने वाली बीमारियों के संकेत पाए जा सकते हैं।
लिपिड टेस्ट क्या है?
लिपिड टेस्ट के दौरान शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के फैट की पहचान की जाती है। ये फैट ब्लड में पाए जाते हैं और मानव शरीर में सबसे सामान्य होते हैं। पहले लिपिड टेस्ट केवल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता लगाने के लिए किया जाता था, लेकिन हाल ही में हुए शोध में यह पाया गया कि लिपिड काउंटिंग के माध्यम से बच्चों में बीमारियों का पूर्वानुमान पहले से ही लगाया जा सकता है।
13000 बच्चों पर किया गया शोध
यह शोध 13000 बच्चों पर किया गया था, जिसमें हजारों बच्चों में लिपिड टेस्ट के जरिए भविष्य में डायबिटीज के जोखिम का अनुमान पहले ही लगा लिया गया। शोध में यह पाया गया कि कुछ बच्चों में बीएमआई (Body Mass Index) में मामूली सुधार के बावजूद डायबिटीज, इंसुलिन प्रतिरोध और बीपी से जुड़ी हानिकारक लिपिड की कमी देखी गई। इन बच्चों में लिपिड का स्तर भविष्य में डायबिटीज का कारण बन सकता है।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इस पर अमल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।