नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। करीब एक दशक से लंबित इस लिस्टिंग प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर अब उन बड़े शेयरधारकों पर है, जिनके पास NSE में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
जानकारी के मुताबिक, यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित होगा। यानी कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। अनुमान है कि इस आईपीओ का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो भारतीय बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है।
NSE के प्रमुख शेयरधारकों में कई बड़े संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। इनमें भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), भारतीय स्टेट बैंक (SBI), विभिन्न सरकारी संस्थान और वैश्विक निवेश फंड प्रमुख हैं। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार LIC ने फिलहाल अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना से दूरी बनाई है और वह NSE में अपने निवेश को लंबे समय तक बनाए रखना चाहती है।
वहीं SBI को इस आईपीओ में सबसे बड़े विक्रेता शेयरधारकों में माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ अन्य संस्थागत निवेशक भी अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेच सकते हैं। बाजार में यह भी चर्चा है कि कई चर्चित निवेशक, जिनमें राधाकिशन दमानी जैसे नाम शामिल हैं, फिलहाल अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखने के पक्ष में हैं।
NSE की लिस्टिंग को लेकर निवेशकों में लंबे समय से उत्साह बना हुआ है। एक्सचेंज देश के पूंजी बाजार का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है और डेरिवेटिव्स कारोबार में दुनिया के प्रमुख एक्सचेंजों में गिना जाता है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और बाजार में दबदबे के कारण इसका आईपीओ निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र माना जा रहा है।
गौरतलब है कि NSE की लिस्टिंग की योजना पहली बार कई वर्ष पहले सामने आई थी, लेकिन नियामकीय और कानूनी कारणों से प्रक्रिया लगातार टलती रही। अब DRHP दाखिल होने के बाद आईपीओ को मंजूरी मिलने और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का रास्ता काफी हद तक साफ होता नजर आ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि NSE का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर सेबी की मंजूरी, प्राइस बैंड और आईपीओ की अंतिम तारीखों पर बनी रहेगी।