राजधानी नई दिल्ली में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दो अन्य सांसदों के साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। उनके साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी आप से इस्तीफा दे दिया है। तीनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने की घोषणा की है।
बीजेपी में शामिल होने वाले प्रमुख नाम:
1. राघव चड्ढा
आप के युवा और प्रमुख चेहरों में शामिल राघव चड्ढा राज्यसभा सांसद हैं और पहले दिल्ली में विधायक रह चुके हैं। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्ढा पार्टी के वित्तीय और रणनीतिक मामलों में अहम भूमिका निभाते थे। उन्हें उनकी साफ छवि और प्रभावशाली वक्तृत्व शैली के लिए जाना जाता है।
2. संदीप पाठक
संदीप पाठक को पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का मजबूत स्तंभ माना जाता था। वे राज्यसभा सांसद होने के साथ-साथ आप के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री भी थे। आईआईटी से शिक्षित पाठक ने पार्टी के विस्तार और चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
3. अशोक मित्तल
अशोक मित्तल एक जाने-माने शिक्षाविद और उद्योगपति हैं। वे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं और आप से राज्यसभा सांसद थे। शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को व्यापक रूप से सराहा जाता है।
4. हरभजन सिंह
पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह अपने आक्रामक खेल और ऑफ-स्पिन गेंदबाजी के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और राज्यसभा सदस्य बने।
5. राजेंद्र गुप्ता
ट्राइडेंट ग्रुप के संस्थापक राजेंद्र गुप्ता एक प्रमुख उद्योगपति हैं। उनका जन्म 2 जनवरी 1959 को हुआ था। उन्हें 2007 में व्यापार और उद्योग में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 2025 में वे पंजाब से राज्यसभा सांसद बने थे।
6. विक्रमजीत सिंह साहनी
विक्रमजीत सिंह साहनी एक उद्योगपति और समाजसेवी हैं। वे सन फाउंडेशन के प्रमुख हैं और आप से राज्यसभा सांसद रहे हैं।
7. स्वाति मालीवाल
स्वाति मालीवाल सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता हैं। वे दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं और महिलाओं के अधिकारों को लेकर हमेशा मुखर रही हैं। हाल के दिनों में उनका अरविंद केजरीवाल के साथ विवाद भी चर्चा में रहा था।
राजनीतिक असर
इन बड़े नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने के फैसले को आप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है, वहीं बीजेपी को इससे राजनीतिक बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है।