पटना: शंभू गर्ल्स हॉस्टल मामला: रेप और संदिग्ध मौत की जांच में नए खुलासे, 17 घंटे का CCTV फुटेज गायब

Patna: Shambhu Girls' Hostel case: New revelations in the investigation into rape and suspicious death, 17 hours of CCTV footage missing.

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की छात्रा से जुड़े रेप और संदिग्ध मौत के मामले ने पूरे बिहार में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं। अब जांच का केंद्र यह बन गया है कि क्या छात्रा को हॉस्टल में ही नशे की गोलियां दी गई थीं और आखिर 17 घंटे का अहम CCTV फुटेज कैसे गायब हो गया।

मामले की जांच अब CID के हाथ में है, जो SIT के साथ मिलकर हर एंगल से पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार, CID ने पटना पुलिस और SIT को 59 बिंदुओं की विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इसमें हॉस्टल, छात्रा के परिवार, दोस्तों और डिजिटल सबूतों से जुड़े कई अहम सवाल शामिल हैं। जांच का फोकस 5 जनवरी रात 9:30 बजे से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे के बीच के समय पर है, जिसे सबसे संदिग्ध माना जा रहा है।

FSL रिपोर्ट से बढ़ा शक
FSL रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म सैंपल 18 से 21 वर्ष के युवकों के बताए गए हैं। इसी आधार पर चार से पांच युवक जांच के दायरे में आए हैं। CID इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या छात्रा को हॉस्टल में एंटी-डिप्रेसेंट या सेडेटिव दवाएं दी गई थीं। कमरे से तीन खाली दवा स्ट्रिप मिलने के बावजूद पुलिस को सिर्फ एक स्ट्रिप सौंपे जाने से संदेह और गहरा गया है।

नाबालिग छात्रा के पास दवाओं की इतनी अधिक मात्रा, वार्डेन द्वारा दवाएं परिजनों को सौंपना और पुलिस को तत्काल सूचना न देना—ये सभी पहलू जांच के घेरे में हैं।

हॉस्टल प्रबंधन पर सवाल
हॉस्टल में CCTV कैमरे का न होना, दरवाजा तोड़ने से पहले किसी प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी न होना और हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी के बावजूद अन्य जिम्मेदारों की भूमिका भी CID की विशेष जांच में है। यह भी खंगाला जा रहा है कि क्या पहले भी हॉस्टल में इस तरह की कोई घटना सामने आई थी।

परिवार की भूमिका और घर ले जाने का रहस्य
जांच का एक अहम पहलू 26 दिसंबर का है, जब छात्रा का पूरा परिवार अचानक हॉस्टल पहुंचा और उसे घर ले गया। आमतौर पर छात्राएं अकेले आती-जाती हैं, ऐसे में परिवार के अचानक पहुंचने के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं। CCTV फुटेज के जरिए छात्रा और परिजनों के व्यवहार का विश्लेषण किया जा रहा है।

घर पर नौ दिन रहने के दौरान छात्रा की मानसिक स्थिति, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और FIR दर्ज कराने में हुई देरी भी जांच के रडार पर है। अस्पताल में बयान न देना और पहले केस दर्ज न कराने की बात कहने वाले संदेशों की भी जांच की जा रही है।

जहानाबाद से पटना तक की कड़ी
26 दिसंबर से 5 जनवरी तक छात्रा जहानाबाद स्थित अपने घर पर थी। इस दौरान वह कहां गई, किन लोगों से मिली और उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। गांव के पड़ोसी, रिश्तेदार और चौकीदार से पूछताछ हो रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं दवा या किसी जहरीले पदार्थ की व्यवस्था घर से तो नहीं की गई थी।

5 जनवरी को पटना लौटने के बाद छात्रा के किसी दोस्त या परिचित से मिलने की संभावना भी जांच में शामिल है। ऑटो चालकों से पूछताछ, स्टेशन और रास्ते के CCTV फुटेज, मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की आशंका, सोशल मीडिया चैट और कोचिंग से जुड़े दोस्तों से जानकारी जुटाई जा रही है। नीट परीक्षा का दबाव और निजी रिश्तों से जुड़ा तनाव भी जांच का हिस्सा है।

17 घंटे का CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सवाल
जांच का सबसे संवेदनशील समय 5 जनवरी रात 9:30 बजे से 6 जनवरी शाम 4 बजे के बीच माना जा रहा है। इसी दौरान छात्रा के कमरे के बाहर का कोई CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि इसी समय उसे दवाएं दी गईं या उसने स्वयं ली हों। DVR की फॉरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं फुटेज से छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

मोबाइल गतिविधियां, कमरे के आसपास अन्य मोबाइल की मौजूदगी और दरवाजा तोड़ने से पहले की हर गतिविधि इसी समयसीमा में जांची जा रही है।

संदिग्ध युवकों पर SIT की नजर
SIT का फोकस अब 18 से 21 वर्ष की उम्र के चार-पांच युवकों पर है, जिनका हॉस्टल या छात्रा से सीधा संपर्क रहा। 25 लोगों के DNA सैंपल लिए गए हैं, जिनका मिलान FSL में मिले सैंपल से किया जा रहा है। इनमें दो युवक सीधे तौर पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े हैं—हॉस्टल मालिक मनीष रंजन का बेटा और हॉस्टल संचालक का बेटा। इसके अलावा जहानाबाद के दो अन्य युवक भी संदेह के घेरे में हैं।

इन सभी की हॉस्टल में मौजूदगी, आवाजाही, कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा और छात्रा से संपर्क की टाइमलाइन का मिलान किया जा रहा है। हॉस्टल क्षेत्र का डंप टावर डेटा भी खंगाला जा रहा है।

इस मामले से जुड़े हर नए खुलासे बिहार के हॉस्टलों में बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच अभी बेहद संवेदनशील दौर में है और CID व SIT की संयुक्त कार्रवाई का मकसद न सिर्फ छात्रा को न्याय दिलाना है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।

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