पटना: राजनीति में लगातार असफलताओं से जूझ रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह अब प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी से नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। 18 मई को वे जनसुराज में अपनी पार्टी ‘आसा’ का विलय करेंगे और आधिकारिक रूप से पार्टी से जुड़ेंगे। बीते दो वर्षों में यह उनकी चौथी पार्टी होगी।
जनसुराज में नई शुरुआत
प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज की ओर से मीडिया को जानकारी दी गई कि एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनडीए से जुड़े बड़े नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। बाद में साफ हुआ कि ये नेता कोई और नहीं बल्कि आरसीपी सिंह हैं, जो कभी नीतीश कुमार के सबसे करीबी माने जाते थे।
‘आसा’ बनाकर भी नहीं मिली राहत
राजनीति में खुद को फिर से स्थापित करने की कोशिश में आरसीपी सिंह ने 31 अक्टूबर 2024 को अपनी पार्टी ‘आसा’ बनाई थी, लेकिन बिहार की राजनीति में यह पार्टी कोई प्रभाव नहीं छोड़ सकी। न चर्चा, न समर्थन—जिससे आरसीपी सिंह पूरी तरह हाशिये पर चले गए।
आरसीपी सिंह का राजनीतिक सफर
- 2010 में IAS से वीआरएस लेकर राजनीति में कदम रखा।
- नीतीश कुमार के प्रमुख सचिव रहे और बाद में जेडीयू से राज्यसभा पहुंचे।
- 2020 में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
- 2021 में केंद्रीय मंत्री बनाए गए, लेकिन इस कदम ने जेडीयू में उनका विरोध शुरू करवा दिया।
- 2022 में राज्यसभा से टिकट नहीं मिला और कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा।
- 2023 में बीजेपी में शामिल हुए, लेकिन लोकसभा टिकट न मिलने से निराशा हाथ लगी।
- अब 2024 में आसा पार्टी बनाई, पर कोई असर नहीं दिखा।
अब प्रशांत किशोर पर भरोसा
नीतीश कुमार से कटने और बीजेपी में भी जगह न मिलने के बाद अब आरसीपी सिंह को प्रशांत किशोर की रणनीति में उम्मीद नजर आ रही है। 18 मई को वे जनसुराज में शामिल होकर नई पारी की शुरुआत करेंगे।
बड़ा सवाल: क्या फिर से चमकेगा सितारा?
आरसीपी सिंह की बार-बार पार्टी बदलने और लगातार मिल रही असफलताओं के बीच अब सवाल यह उठता है कि क्या जनसुराज पार्टी उनके राजनीतिक जीवन को नई दिशा दे पाएगी? इस सवाल का जवाब तो भविष्य देगा, लेकिन फिलहाल आरसीपी सिंह ने एक बार फिर सियासी दांव खेल दिया है।
नोट: जनसुराज पार्टी बिहार में बदलाव की नई राजनीति का दावा कर रही है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आरसीपी सिंह का अनुभव और प्रशांत किशोर की रणनीति मिलकर कोई असर डाल पाते हैं या नहीं।